STORYMIRROR

Vinita Shukla

Inspirational

3  

Vinita Shukla

Inspirational

जिजीविषा... जिजीविषा!

जिजीविषा... जिजीविषा!

1 min
222

युगों युगों से है

सृजन की प्रेरणा समष्टि में

कोई तो है, जो भर रहा

सुहाने रंग सृष्टि में

कि जिसकी दिव्य तूलिका से

सज गई दिशा दिशा

जो धड़कनों में गा रहा

जिजीविषा... जिजीविषा!

अपने अपने मरुथलों में

चल रहे हैं हम सभी 

अलग अलग इबारतों में

ढल रहे हैं हम सभी

मरीचिका के रूप भिन्न 

किन्तु एक सी तृषा

जो व्यग्र हो पुकारती-

जिजीविषा... जिजीविषा!


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational