जीवन
जीवन
जीवन के मोड़ पर होता हकीकतों और फसानों का फैसला
कहीं अँधेरा कहीं उजाला,
फिर भी लड़ रही हूँ,
अपनी सफलता के लिए।
पता नहीं जींदगी के मोड़ पर अब क्या लिखा है?
आधी राह चल चूकी हूँ,
अब मैं या तुम लौट नहीं सकते,
क्योंकि सफलता के लिए आधी राह चलना है।
और लौट ने के लिए भी आधा ।
हार-जीत का खेल है ; जीवन,
खेल समझकर खेल लो,
कहीं धूप है कहीं छाँव
खुशी खुशी तुम ले लो।
चले तो आत्मनुशासन से,
जीवन में मुश्किले तो आँएगी पर
पीछे मत देखो ............
जो भी मिलता हाथ बढा़कर खुशी खुशी तुम ले लो।
जीवन में फिर दो मोड़ आएँगे
हार और जीत
हार मिली तो कोशिश कर के ,
जीत को हासिल करो।
जीवन तो एक खेल है
हार जीत का दोस्तो।।।
