STORYMIRROR

Prabhudayal Khattar

Abstract

3  

Prabhudayal Khattar

Abstract

जीवन बीता जाता

जीवन बीता जाता

1 min
375

किसी काम को करते समय 

मुझे जब ध्यान नहीं होता 

अचानक अपनी दोनों आँखों को

पाता मैं रोता।


रोक काम को,

पोंछ आँख को 

सोच में  मैं पड़ जाता  

कैसा दुःख है मुझको 

क्यों आँख में पानी आता ?


नभ की ओर घुमाकर दृष्टि

मैं जिज्ञासा से भर जाता 

अनायास ही भीतर से 

फिर यह प्रश्न है आता। 


प्रभु के भजन तू कब जाएगा 

यह जीवन बीता जाता ?

कृपा करो कृपानिधान,

मुझसे जोड़ो नाता। 

हे दाता !


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract