STORYMIRROR

सुरशक्ति गुप्ता

Abstract

2  

सुरशक्ति गुप्ता

Abstract

झूठी बातें

झूठी बातें

1 min
137

झूठी बातों का जमाना है

मुक्तक का यही तराना है


कभी हल्का तो कभी पड़ा

किसी पर भारी

अब छूट गई दुनियादारी।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract