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Praveen Gola

Romance


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Praveen Gola

Romance


जब तुझे पाने की कोशिश की

जब तुझे पाने की कोशिश की

1 min 157 1 min 157



जब तुझे पाने की कोशिश की ,
दिल संभलने लगा .....
तेरे - मेरे रिश्ते को समझ कर  ,
और जलने लगा |

तुझसे दूरी बनाने की ,
तब एक ज़िद सी चढ़ी ,
क्या सही क्या है गलत ,
ये और समझने लगा |

बहुत नादान था ये जो कभी ,
तेरी बातों पर कर बैठा एतबार ,
सोचा था इसने कि मिलेगा ,
इसे यहीं सच्चा प्यार |

मृग तृष्णा के भरम में ,
ये उलझता ही गया  ,
तेरी बातों के नशे का ,
स्वाद चखता ही गया  |

गहरे ज़ख्म पर मरहम लगा के  ,
इस दिल का घाव भरने लगा  ,
जब तुझे पाने की कोशिश की ,
दिल संभलने लगा ||


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