Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

कल्पना रामानी

Inspirational

5.0  

कल्पना रामानी

Inspirational

जब से कर ने गही लेखनी

जब से कर ने गही लेखनी

1 min
524



जब से कर ने गही लेखनी

शीश तान चल पड़ी लेखनी


बिन लाँघे देहरी-दीवारें

दुनिया भर से मिली लेखनी

 

खूब शिकंजा कसा झूठ ने  

मगर न झूठी बनी लेखनी 


हारे छल-बल, रगड़ एड़ियाँ  

कभी न लेकिन झुकी लेखनी


कभी नहीं सम्मान खरीदे

मान बचाती रही लेखनी 


हर मौसम के रंगों में रँग

रही बाँटती खुशी लेखनी


परिचित मुझसे हुआ तभी जग

जब परिचय से जुड़ी लेखनी


जीवन भर अब साथ ‘कल्पना’

चिरजीवी चिरजयी लेखनी 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational