जब नाचें घुंघरू साज पर
जब नाचें घुंघरू साज पर
जब नाचें घुंघरू साज पर शायरी आ जाती है।
बिछड़ी हुई तस्वीर दौड़कर सामने आ जाती है।।
कसक वह बंदगी की कहती है दिल से आकर।
खुश रहती न मोहब्बत महबूब से दूर जाकर।।
जब बैठे भंवरा फूल पर आशिक आ जाती है।
बिछड़ी हुई तस्वीर दौड़कर सामने आ जाती है।।
अधूरी कोई कहानी आवाज दे रही है।
बार-बार जाने क्यूं इम्तिहान ले रही है।।
जब लौटे कोई परदेसी घर खुशी सि छा जाती है।
बिछड़ी हुई तस्वीर दौड़कर सामने आ जाती है।।
ढूंढते जो जहां में कमियां वो खुदी में।
जानते न वो पागल कमियां हर किसी में।।
जब रोता कोई याद कर चाह भी आ जाती है।
बिछड़ी हुई तस्वीर दौड़कर सामने आ जाती है।।
जब नाचे घुंघरू साज पर शायरी आ जाती है।
