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Mahendrara Pal

Abstract

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Mahendrara Pal

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जब नाचें घुंघरू साज पर

जब नाचें घुंघरू साज पर

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जब नाचें घुंघरू साज पर शायरी आ जाती है।

बिछड़ी हुई तस्वीर दौड़कर सामने आ जाती है।।


कसक वह बंदगी की कहती है दिल से आकर।

खुश रहती न मोहब्बत महबूब से दूर जाकर।।

जब बैठे भंवरा फूल पर आशिक आ जाती है।

बिछड़ी हुई तस्वीर दौड़कर सामने आ जाती है।।


अधूरी कोई कहानी आवाज दे रही है। 

बार-बार जाने क्यूं इम्तिहान ले रही है।।

जब लौटे कोई परदेसी घर खुशी सि छा जाती है।

बिछड़ी हुई तस्वीर दौड़कर सामने आ जाती है।।


ढूंढते जो जहां में कमियां वो खुदी में। 

जानते न वो पागल कमियां हर किसी में।।

जब रोता कोई याद कर चाह भी आ जाती है।

बिछड़ी हुई तस्वीर दौड़कर सामने आ जाती है।।

जब नाचे घुंघरू साज पर शायरी आ जाती है।


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