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Mahendrara Pal

Abstract

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Mahendrara Pal

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मन के करीब आए कई

मन के करीब आए कई

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मन के करीब आए कई भाया न एक।

हो जाते जिसके हम नजर आया न एक।।


गहराई क्या जाने जो डूबा न हो।

दरिया प्यास न जाने जो सूखा न हो।।

बादल कितनी बार छाए बरसा न एक।

हो जाते जिसके हम नजर आया न एक।।


धूप न जिसने देखी जाने क्या जलन।

बूटा न छोड़े पंछी देखे क्या गगन।।

देख तनहाइयां पास आया न एक।

हो जाते जिसके हम नजर आया न एक।।


वो राह क्या दिखाए जो चला ही न हो।

वो थकन क्या जाने जो थका ही न हो।।

आए दिल में रहने कई ठहरा न एक।

हो जाते जिसके हम नजर आया न एक।।

मन के करीब आए कई भाया न एक।


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