STORYMIRROR

Mahendrara Pal

Others

4  

Mahendrara Pal

Others

तुम्हारी छत की तरह

तुम्हारी छत की तरह

1 min
242

तुम्हारी छत की तरह हमारी छत पर भी बारिश है

तुम्हें बारिश से बचने की हमें भीगने कि आदत है 

गागर जो जितनी तपी होगी उतनी ही शीतल होगी 

चित्रकार की भव्य कल्पना से ही तस्वीर काबिल होगी

तुम्हारे मन की तरह हमारे मन की भी चाहत है 

तुम्हें इच्छा कहने की हमें मौन रहने की आदत है 

तुम्हारी छत की तरह हमारी छत पर भी बारिश है

प्रीत कितनी कर लो दुनिया से इल्जाम तो आना है

साफ कितना भी करलो चरित्र चित्र धूल तो आना है 

तुम्हारी ख्वाहिश की तरह हमारी भी ख्वाहिश है

तुम्हें शोर में रहने की हमें एकांत की आदत है 

तुम्हारी छत की तरह हमारी छत पर भी बारिश है 

चंचलता से मुक्त गर मन होता तो वेदना न होती

प्रेम अगर संसय मुक्त होता तो मन शंका न होती 

तुम्हारी शिकायत की तरह हमारी भी शिकायत है

तुम्हें मुख फेरने की हमें स्वीकार करने की आदत है 

तुम्हारी छत की तरह हमारी छत पर भी बारिश है 

तुम्हें बारिश से बचने की हमें भीगने की आदत है 



Rate this content
Log in