तुम्हारी छत की तरह
तुम्हारी छत की तरह
तुम्हारी छत की तरह हमारी छत पर भी बारिश है
तुम्हें बारिश से बचने की हमें भीगने कि आदत है
गागर जो जितनी तपी होगी उतनी ही शीतल होगी
चित्रकार की भव्य कल्पना से ही तस्वीर काबिल होगी
तुम्हारे मन की तरह हमारे मन की भी चाहत है
तुम्हें इच्छा कहने की हमें मौन रहने की आदत है
तुम्हारी छत की तरह हमारी छत पर भी बारिश है
प्रीत कितनी कर लो दुनिया से इल्जाम तो आना है
साफ कितना भी करलो चरित्र चित्र धूल तो आना है
तुम्हारी ख्वाहिश की तरह हमारी भी ख्वाहिश है
तुम्हें शोर में रहने की हमें एकांत की आदत है
तुम्हारी छत की तरह हमारी छत पर भी बारिश है
चंचलता से मुक्त गर मन होता तो वेदना न होती
प्रेम अगर संसय मुक्त होता तो मन शंका न होती
तुम्हारी शिकायत की तरह हमारी भी शिकायत है
तुम्हें मुख फेरने की हमें स्वीकार करने की आदत है
तुम्हारी छत की तरह हमारी छत पर भी बारिश है
तुम्हें बारिश से बचने की हमें भीगने की आदत है
