STORYMIRROR

Ayushee prahvi

Inspirational

4  

Ayushee prahvi

Inspirational

जब कभी उड़ो तुम

जब कभी उड़ो तुम

2 mins
89

जब कभी उड़ो तुम

धारा के विपरीत

दम जरा ज्यादा भरना

जब कभी ठान लो तुम

सच्ची बात कहना

जरा ज्यादा मजबूत कलेजा रखना

क्योंकि मेरे दोस्त

अपनी राह खुद गढ़ने वालों को

नहीं मिलते कहीं नींव के पत्थर

कहीं सफर में छांव

कहीं घड़ी भर दम

कहीं जी भर दुलार

उसके रास्ते का नहीं होता कोई कम्पास

ऐसे में अगर कभी भटक जाओ,

मेरे दोस्त,रास्ता मत पूछना !

क्योंकि जिनसे तुम्हारा सामना होगा

उनकी पैरहन फरिश्तों जैसी होगी

जिसमें छुपे होंगे उनके बाघनख

वो नहीं लिए होंगे

भाले बरछी तीर

और वो तुम पर

सामने से हमला भी नहीं करेंगे

ये दौर थोड़ा नया है

वो तुम्हें मारेंगे नहीं,

पर जिंदा भी नहीं छोड़ेंगे।

वो बिल्कुल भी नहीं करेंगे अट्टहास ।

इसलिए जब कभी

धारा के विपरीत निकलो

अपनी दृष्टि ख़ूब मांज लो

क्योंकि इस सफर में 

केवल वही है तुम्हारा हथियार।

(सुशांत सिंह राजपूत के दुःखद निधन पर)


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational