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Pushpa Nirmal

Abstract

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Pushpa Nirmal

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इंतजार की घड़ियाँ

इंतजार की घड़ियाँ

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ख़यालों को क्यूँ अटका कर नाउम्मीद किये जाते हो

कलम की नोक को लोरी सुना- मीठी नींद सुलाते हो

जोश के भी होश उड़ जाते हैं अक्सरहाँ,

क्यूँ उल्फ़त के ज़ाम खाली कर जाते हो


सराबोर करने का वायदा किया था तुमने कभी,

अब रिश्ते को तोड़ इंतजार के ख्वाब दिखाते हो


इंतजार की घड़ी थम रात कटती नहीं

लौट के चिराग़ फिरसे नहीं सजाते हो


उल्फत की दुनिया को- इसतरा बदनाम न कर

अमावस की रात से जिंदगी को कज़ा बनाते हो


इंतजार की घड़ी थम रात कटती नहीं

लौट के चिराग़ फिरसे नहीं सजाते हो!


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