STORYMIRROR

Dr. Akansha Rupa chachra

Abstract

4  

Dr. Akansha Rupa chachra

Abstract

हसीन लम्हे

हसीन लम्हे

1 min
399

वीरानों में कभी यादों को टटोल कर देखा

अपने आप को यादों की गठरी मे फरोल कर देखा

उम्मीद की चादर को जब ओढ़ा दिल के जज्बातों को

झंझोर कर देखा।

दूर स्मृतियों के गाँव से हम वीरानों की दलानो पर

खडे़ थे।

हिचकी चाहत की आई।

मुसकुराहटो ने हमें छूकर

हौले से बोला दिल में रहने वाले •••••

यादों की डगर पर चलते हैं।

थाम लो बीते लम्हों की खुशियों को

प्यार करने वाले कभी हारा नहीं करते।

अपना सब न्यौछावर कर , दिल हार कर पाया है

जिसे उसकी यादों को भी रूसवा नहीं करते।

पलकों को बंद करके स्वप्न लोक मे रहने वालों के लिए 

अश्रु रूपी मोती छलकाना लाजमी नहीं।

उनकी यादों के सुखद अहसास को दिल में रखा करते हैं।

गुलाबों की तरह।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract