हंसती आंखें
हंसती आंखें
उर में हर्षोद्गार, कराती हँसती आँखें।
भाती मन को खूब, सदा ही हँसती आँखें।
आँखों की हर बात, समझते बचपन से हम।
मिलते जो निर्देश, नयन से, समझें हरदम।
समझें माँ की बात, अगर वो कसती आँखें।
भाती मन को खूब, सदा ही हँसती आँखें।
मन का सारा हाल, नयन अपने बतलाते।
सुख दुख के जो भाव, सहज ही, सब दर्शाते।
उगले जब अंगार, हृदय को डसती आँखें।
भाती मन को खूब, सदा ही हँसती आँखें।
भाँति-भाँति के रंग, जगत में हैं जो बिखरे।
इन सबसे ही रूप, सृष्टि का, अद्भुत निखरे।
मिले मनोरम दृश्य, वहीं पर फँसती आँखें।
भाती मन को खूब, सदा ही हँसती आँखें।
नयन कटीले, गोल, कभी कजरारे होते।
गहराई में डूब, कभी उसमें ही खोते।
सुंदर, सुगढ़, सुरम्य, सदा मन बसती आँखें।
भाती मन को खूब, सदा ही हँसती आँखें।
नयनों की यह ज्योति, प्रकृति की देन निराली।
सदा सजगता संग, करें इसकी रखवाली।
होती हैं अनमोल, नहीं ये सस्ती आँखें।
भाती मन को खूब, सदा ही हँसती आँखें।
