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ARYAN VERMA

Abstract

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ARYAN VERMA

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हम चले

हम चले

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रूठे मौसम को मनाने हम चले, 

बेरुखे यादों को भुलाने हम चले..

चले हम खुद को यूँ मनाते खुद से, 

कि साथ यारों के दिल्लगी लगाने हम चले।


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