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Neha 6v mandot

Romance

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Neha 6v mandot

Romance

हे प्रिये

हे प्रिये

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हे प्रिये ,


मैं,

नहीं कह सकी,

 तुम्हें कभी ,

 ""हे प्रिये""।

परंतु,

कहना चाहती हूं, 

आज तुम्हें...

""हे प्रिये"" ।।


मैने ,

मैने दशकों से ,

अपने हृदय के भीतर ।

तुम्हारे लिए ,

जो मेरा प्रेम है,

छुपा रखा है ।।

जैसे ,

कोयले की खान में ,

कोई हीरा छुपा लेता हैं।

और 

समय आने पर ,

वह उजागर हो जाता है।।

ये 

वही समय है ,

" प्रिये " ।।


जब ,

मैं तुमसे ,

साझा करूंगी ,

अपनी ,

असीमित भावनाओं को ,


मैं ,

कभी नदियों सी, 

धारा प्रवाह बहुंगी ,

और,

बहती चली जाऊंगी ।।

कभी तो ,

बांध लूंगी, 

खुद को ,

समाज के ,

सामाजिक ,

रीति रिवाज़ो में ।।

और ,

कभी ,

तोड़ दूंगी,

सारे बंधन

सिर्फ ,

तुम्हारे प्रेम के लिए ।


कभी न,

तुममें खोकर ,

मैं ,

खुद को भुला दूंगी ,

और डूब जाऊंगी,

तुम्हारे ,

प्रेम की गहराइयों में ।

कभी,

तुम्हारी आंखों का ,

इतना ज्यादा नशा करूंगी ,

की सिर्फ ,

हमारा प्रेम ही ,

अफ़ीमी लगे।।


तुम्हारी ,

शहद से मीठी बाते ,

जिसका,

मुझे चस्का लगा है ,

की दुनिया की ,

सारी सट्टे बाज़ी बेकार ।

सनम,

जब से ,

हमने हमारा दिल,

दिया तुझ पर वार ।।


""हे प्रिये ""


तुम्हे मैं बताऊंगी ,

की तुम ,

मेरी सुबह का ,

पहला खयाल हो, ।

और ,

जिसे मैं ,

नींद में भी ,

खुद से ,

जुदा नहीं कर पाती हूं,

तुम,

मेरे वो ख्वाब हो ।।


तुम कैसे ?

मेरे साथ – 

उठते ,बैठते ,

चलते ,फिरते ,

नाचते ,गाते हो ।

तुम ,

मेरा दुःख नहीं बांटते, 

न ही हंसाते हो,

क्योंकि ,

तुम ,

मौजूद ही नहीं होते कभी,

पर ,

साथ मेरे ही,

रह जाते हो ।।


""हे प्रिये ""

हर सुबह ,

मैं भी ,

भारतीय पत्नी की तरह ,

तुम्हारे हाथों में ,

चाय का कप पकड़ाती हूँ।

सज धज कर 

सिंदूर ,

तेरे नाम का लगाती हूँ ।

ब्रेक फास्ट, 

लंच ,डिनर प्यार से पकाती हूँ ।।


तू ,

जब घर से ,

निकलता है तो

""अच्छा सुनो न ""

,कहकर

तुम्हे पुकारती हूंऔर ,

बाल तेरे सहलाती हूं।


बिन तेरे है ,

भोर अधूरी,

बिन तेरे ,

हर शाम है फीकी ।।

घर को जो तू ,

लौट के आए तो,

बाहों में तेरे सो जाती हु।।


"हे प्रिये "

"सुनो ना "

मैं,

तुमसे 

बहुत कुछ कहना चाहती हूं 

दशकों से ,

जो कभी कहा नहीं...


तुम ,

जीवन का ,

सबसे खूबसूरत अहसास हो।

तुम जान हो,

तुम प्रेम हो ,तुम स्वास हो ।

जो कभी ,मुमकिन ही न हो सका ।

तुम,

वो अधूरी प्यास हो।

मेरी रूह में ,

जो कसक उठती रही सदा,

तुम वहीं ,

प्रेम की आवाज हो ।

जो कभी ,

पूर्ण ना किया जा सका,

तुम वहीं,

आत्मा के ,

प्रेम का आगाज़ हो ।

तुम जीवन हो,

तुम सृष्टि हो

तुम विरहन हो ।

जिसके लिए मैं,

तड़पती हु,

तुम वो रंग हो ।

जिसके लिए, 

सदा हाथ उठता है ।

तुम वो प्रार्थना हो, 

दुआ हो ।

तुम्हारे चरणों में ,

अपना सर क्या??

मैं संपूर्ण, 

स्वयं समर्पित हूं।।

""हे प्रिये ""

तुम ,

मेरे भगवन हो


""हे प्रिये ""

""तुम मेरे भगवन हो ""


और,

 ये सब ,

प्रिये 

कहना है तुमसे...

कहना है ,

मेरी दर्द ,

मेरी तकलीफ ।।

जो ,

किसी ओर का 

तुम्हे पाकर 

मैं महसूस करती हु।।


कहना है ,

जो तुम्हे,

किसी और की ,

बाहों में देख,

मैं,

कैसे मरती हु।।

और 

ऐसे तिल तिल मरने ,

और,

तुमसे ,

""अन्नत प्रेम करने" ,

का विवरण ,

तुम्हे,

विस्तार पूर्वक कहना है।


हे प्रिये ,

ये मेरा ,

प्रेम पत्र मुझे 

तुम्हें ,

समर्पित करना है।।




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