हौसला
हौसला
शरारत करने वाले
शरारती तो होते है,
पर रास्ता यहीं एक दिन
अपनी खुद बनाते हैं
आग से भिड़ने वाले,
आग में भी जल जाते है
लड़ने तकलीफ़ों से,
यहीं एक दिन दिखा हमें तो जाते है
फ़ैल होने वाले विद्यार्थी भी,
खाकर ठोकर,
हौसला अपना बनाये रखते है
मिसाल हौसला की,
सिखने मिलते तो उनसे भी है
गर्व पास होने का,
खुशी भी जुटते उनसे जो है
आखिर दुनिया वहीं बदलते है,
जो तूफ़ानो मे पलते है
हर छोटी-मोटी नालिओं से,
उनकी औकात को परखना नहीं चाहिए
आखिर ज़ब वह मिलते है,
एक विशाल नदी बन उभरते है
पहचान यही बातों से,
चलता इंसानों के बेवकूफी का हैंंं
ज़ब ये इंसान
इंसान को इंसान समझ न पाते हैं
इंसानियत पर दाग दे जाते हैं
जूते फटे पहन दशरथ..
थे चढ़े पहाड़ पे
औकात से बड़े थे,
ख्याब उनके,
ख़्वाब टूटे से लगते थे
मगर हौसला अपना,
आशमान की बुलंदियों सा रखते थे
गम में ही सही,
पहाड़ को झुकाऐ,
अपने हौसले से थे।
