STORYMIRROR

Sugendha Jain

Romance

4  

Sugendha Jain

Romance

गुमशुदा

गुमशुदा

1 min
423

यह कुछ धुआं धुआं सा है।।

 यह कुछ नया नया सा है।।


गुजर रही है जिंदगी

कुछ टिक टिक की तरह,

रात हो या दिन बस यही

सूना सूना सा है, 


मेरी आंखों में देखकर

पता करते हैं वो,,

मेरी जिंदगी में क्या कुछ

नशा नशा सा है,


दिल पर दस्तक देते हैं यह लम्हे 

हमें पता है यहां कोई गुमशुदा सा है,

ये कुछ हुआ धुआं सा है......


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Sugendha Jain

Similar hindi poem from Romance