STORYMIRROR

Sunil Kumar

Abstract

4  

Sunil Kumar

Abstract

गणेश वंदना

गणेश वंदना

1 min
285

हे गौरी सुत गणेश

हर लो मेरे कलेश

विघ्नहर्ता तुम सारे जग के 

फिर काहे की है अब देर

हे गौरी सुत गणेश

हर लो मेरे कलेश।


भक्तों के तुम रखवाले

बिगड़ों के सब काज संवारे

तनिक करो न अब तुम देर

हे गौरी सुत गणेश 

हर लो मेरे कलेश।


मूषक की करते सवारी

हरते सबकी विपदा सारी

सुन लो तुम अरज हमारी

आयी मैं द्वार तिहारी।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract