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Abhijit Tripathi

Abstract

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Abhijit Tripathi

Abstract

गांव वालों को

गांव वालों को

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बेघरों को तो छांव मिल ही जाती है,

वो कहां दरबदर होते हैं।


भटकते वो हैं ख्वाहिशों के बोझ लिए

गांव में जिनके घर होते हैं।


गांव वालों को अपनी तहजीब पर

वाजिब गुरूर होता है।


आँचल फटा ही सही लेकिन

सिर पर जरूर होता है।


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