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ritesh deo

Abstract

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ritesh deo

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एक तरफा इश्क

एक तरफा इश्क

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इक तरफा इश्क़ था तो हम मुस्कुरा लेते थे

हंँसी में उसकी शामिल होकर गुनगुना लेते थे


ग़लती से पलटकर देख लेती थी जो वो हमें

ख़ुशी में झूमकर हम थोड़ा सा शर्मा लेते थे


सब कुछ अच्छा ही तो चल रहा था हमारे बीच

हम उससे इश्क़ न कर के भी इश्क़ फ़रमा लेते थे


पर ग़लती कर दी उसने हाल पूछकर हमारा

वरना मुहब्बत हम भी अच्छे से छुपा लेते थे।



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