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Shilpa Sekhar

Abstract

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Shilpa Sekhar

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दूरवाणी

दूरवाणी

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आओ सुनाऊं एक कथा सुहानी,

आविष्कार जिसका नाम है दूरवाणी।


सालों पहले ये दुनिया में आया,

आते ही क्या तूफान मचाया


कोसों दूर‌ जो लोग थे रहते,

उनसे मिनिटों में बातें कर पाते


दूरी से ना दुःखी होता इन्सान,

जब चाहे‌ तब, बतियाना था आसान


पहले था वो कहीं किसी एक के पास,

फिर भी था वो सब को खास!


दीवार पर या मेज़ पर रहता,

सदा उसको एक कपड़ा ढ़कता।


उसकी थी एक तार थोड़ी लंबी,

जिससे आस-पास रहकर ही बातें होती।


फिर आया बिना तार का फोन,

कहते थे उसे कोर्डलेस फोन।


इसमें ‌था एक अनोखा पट्टा,

जिसे दबाने पर था फोन लगता।


फिर आती है मोबाइल की बारी,

जो है सब को ‌जान‌ से प्यारी।


इसे लेकर आप घूम भी सकते,

बातें कर लो राहों में चलते फिरते।


ऐसी चली आयी बरसों से ‌इसकी कहानी,

सब का चहीता‌ और खास बना दूरवाणी।


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