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moksh rajpal

Abstract

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moksh rajpal

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Dosti

Dosti

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पाया जो आपको अपना परिवार मैंने,

खुदा मुझपर बहुत ही मेहरबान होगा,


नहीं सोचा था कि मुझ पर आपकी 

रफ़ाकत का वरदान होगा।


किसी भी चीज से तुलना

करना वाज़िब तो नहीं,


पर इस रिश्ते के आगे सोने का ढेर भी

महज़ पत्थरों की खदान होगा।


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