दोहे : लोभ
दोहे : लोभ
लोभ मूल सब पाप का, लोभ से कष्ट महान
लोभ छोड़ तीनों मिले , चैन, सुयश, सम्मान
लोभी नर दुख में जिए, दुख में ही मर जात
लोभ बड़ी एक व्याधि है, ज्यूं सम सन्निपात
जो सुख पावै जीव को , तज दै चार विकार
काम क्रोध मद लोभ के , मूल में कष्ट अपार।
