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Siya Vatnani

Inspirational

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Siya Vatnani

Inspirational

देवी अहिल्याबाई होल्कर

देवी अहिल्याबाई होल्कर

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कोटि कोटि नमन उस वीर को,

जिन्होंने मालवा का उद्धार किया। 

जगदम्बा की अवतार थी वह, 

प्रजा के साथ सदैव न्याय किया। 


चौंडी गांव में जन्मी थी वह,

मानकोजी और सुशीला की सुपुत्री थ।  

अति संस्कारी, मन से चंचल,

सबके दुःख दर्द मिटाती थी। 


सुबेदार मल्हारराव से मिली,

आठ वर्ष की अहिल्या बाई। 

विवाह हुआ राजकुमार खंडेराव से,

अपना घर छोड़ राज घर सँभालने आई।  


समय बीता, होल्कर आँगन में,

खिले दो फूल प्यारे। 

मालेराव और मुक्ताबाई, 

सबके थे वह राज दुलारे। 


काल अचानक मंडराया,

पति खंडेराव ने स्वर्गवास पाया। 

दुःख से देना चाहती थी अपनी बलि, 

पर मल्हार राव ने सती होने से बचाया। 


जब ससुर भी बीमार हुए,

अहिल्या को मालवा का ताज पहनाया। 

आदिनाथ ने रक्षा करी,

जब जब मंडराया खतरों का साया।  


राजगद्दी मिलने के बाद इंदौर स्वामिनी पर आया रजवाड़े की सुरक्षा का दायित्व,

उन्होंने सौंपा विश्वासपात्र तुकोजी को मालवा का सेनापतित्व।  


प्रजावत्सला, मधुर भाषिनी, रानी अहिल्या ने फिर राज-काज सम्भाला

शासन निपुण न्यायाधीश थी वह, कुरीतियों का विनाश कर डाला 


उन महान शिव भक्तिनी ने, काशी विश्वनाथ मंदिर पुनः बनाया 

ऐसा मज़हबी कार्य करके, भोलेनाथ का असीम आशीर्वाद पाया 


हम मालवा नागरिक नहीं भूल पाएंगे 

महारानी अहिल्याबाई होल्कर की यह महा गाथा 

जिनके सामने हर भारत वासी 

झुकाता है अपना माथा


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