देख मुझको भी इतराई होगी
देख मुझको भी इतराई होगी
देख मुझको भी इतराई होगी
नैनों से नैन लड़ाई होगी
छत पे आकर तुमनें भी ऐसे
नींद अपनी भी गँवाई होगी
धूप सी है ये कहानी मेरी
तिरछी मिरछी ही सुनाई होगी
दिल में दस्तक़ यूं मेरे होती है
चाहत उसने ही छुपाई होगी
पाने के खातिर जहाँ में मुझको
कोई साज़िश तो रचाई होगी
ख़्याल ख्यालों में ही आएगा यों
नींद अपनी भी उड़ाई होगी
उनके नज़रों का पानी मर जाएगा
झूठ में डुबकी लगाई होगी।
