Shamim Shaikh
Abstract
उपर का हिस्सा है काग़ज़ का
और नीचे का है लकड़ी
कर लो चाँद फ़...
जन्म दिन मुबा...
परिश्रम ही पू...
बचपन का सफ़र!
मुकम्मल मौत
ईद आने वाली ह...
हॅपी बर्थ-डे ...
वन्दे मातरम!
विविध है वेश भूषा पर.. अपना भारत एक..! विविध है वेश भूषा पर.. अपना भारत एक..!
अंजनी पुत्र प्रभो, भक्ति उभारते। महाबली हनुमान, शक्ति निखारते ।। अंजनी पुत्र प्रभो, भक्ति उभारते। महाबली हनुमान, शक्ति निखारते ।।
धन्य है हम भारतवासी, तीन बार ऐसे प्रधानमंत्री पाये।। धन्य है हम भारतवासी, तीन बार ऐसे प्रधानमंत्री पाये।।
लगता है ग़ुम हो जाऊं तन्हाई में खो जाऊं। लगता है ग़ुम हो जाऊं तन्हाई में खो जाऊं।
चल पड़े मजदूर काम पर, नव निर्माण का नींव बनाने को। चल पड़े मजदूर काम पर, नव निर्माण का नींव बनाने को।
कोई मल्लाह नहीं, सवारी नहीं और न ही कोई चप्पू कोई मल्लाह नहीं, सवारी नहीं और न ही कोई चप्पू
वफ़ा से निभाता रहा दोस्ती को ! बहुत ही उसी ने छला दोस्ती को। वफ़ा से निभाता रहा दोस्ती को ! बहुत ही उसी ने छला दोस्ती को।
बीते हुए वे भी क्या दिन हुआ करते थे, सब मिल दीवाली गुरुपर्व ईद मनाते थे। बीते हुए वे भी क्या दिन हुआ करते थे, सब मिल दीवाली गुरुपर्व ईद मनाते थे।
उसने हर गम को कहीं, दिल में छुपाया होगा। उसने हर गम को कहीं, दिल में छुपाया होगा।
मह-ओ-मेहर क्या सितारों ने भी लिया मुँह मोड़ है। मह-ओ-मेहर क्या सितारों ने भी लिया मुँह मोड़ है।
पृथ्वी सबको अन्न-जल दे, भार भी वहन करे, पर पृथ्वी कभी ना इस चीज का घमंड करे। पृथ्वी सबको अन्न-जल दे, भार भी वहन करे, पर पृथ्वी कभी ना इस चीज का घमंड करे।
दौलत के चक्कर में देखो इंसान को, स्वयं को ही कैसे-कैसे खेल खिलाए हैं। दौलत के चक्कर में देखो इंसान को, स्वयं को ही कैसे-कैसे खेल खिलाए हैं।
ये अहसान भी आप का कुछ कम नहीं था। ये अहसान भी आप का कुछ कम नहीं था।
जमीन बोली- हां, मुझे कोई ठीक से देखता तक नहीं क्या मैं इतनी कुरूप हूँ ? जमीन बोली- हां, मुझे कोई ठीक से देखता तक नहीं क्या मैं इतनी कुरूप हूँ ?
जीवन पथ पर तुम से किसी को, कष्ट न हो ये ध्यान रहे, जीवन पथ पर तुम से किसी को, कष्ट न हो ये ध्यान रहे,
दिन भर का थका हारा सोच रहा बैठ खेत की मेड़ पर। दिन भर का थका हारा सोच रहा बैठ खेत की मेड़ पर।
सोलह श्रृंगार से सजी दुल्हन पहुंची द्वारे ससुराल, सोलह श्रृंगार से सजी दुल्हन पहुंची द्वारे ससुराल,
शाम से कोई साया सा लिपटा है मेरे मन से भी शाम से कोई साया सा लिपटा है मेरे मन से भी
हर पल दे मेरा साथ मेरी खुशियों का आधार, मेरा परिवार ही मेरा खूबसूरत सा संसार है। हर पल दे मेरा साथ मेरी खुशियों का आधार, मेरा परिवार ही मेरा खूबसूरत सा संसार ...
कितनी लापरवाह गर्मी की धूप है सूरज ने दिखाया आज कैसा रूप है। कितनी लापरवाह गर्मी की धूप है सूरज ने दिखाया आज कैसा रूप है।