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Harjinder kaur Narang

Children

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Harjinder kaur Narang

Children

चिड़िया

चिड़िया

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चिड़िया का चहचहाना मेरे आंगन को सजाना

आता है याद मुझको बीता हुआ जमाना 

घर के आलने में वह घोंसला बनाती

तिनका-तिनका जोड़ कर घर को वह सजाती

सुबह चीं चीं से उसकी नींद का खुल जाना

आता है याद मुझको बीता हुआ जमाना।


चिड़िया और चिड़ा की प्रेम कहानी

चुगते थे मिलकर वो सदा दाना पानी

फिर उनके परिवार में छोटे-छोटे बोट मुस्कुराना

आता है याद मुझको बीता हुआ जमाना।


चहचहाने में उसके संगीत सुन लेते

फुदकती थी जब वह हम मुस्कुरा लेते

कभी पूरे घर में उसका चक्कर लगाना

आता है याद मुझको बीता हुआ जमाना।


दाना पानी उसके लिए हम भी रख देते

आते-जाते उसका अपने बच्चों को खिलाना

फिर बच्चों का भी चीं चीं कर शोर मचाना

आता है याद मुझको बीता हुआ जमाना।


बच्चे धीरे-धीरे सीख रहे पंख फैलाना

हो जाएं जब बड़े तो उनको है उड़ जाना

उनको अपना अलग आशियाना बनाना

आता है याद मुझको बीता हुआ जमाना।


अब ऊँची-ऊँची बिल्डिंगों ने उनका आशियाना छीना

शहरों से दूर हो गई रहा उनका ना ठिकाना

चाहता है दिल फिर उनको ढूँढ लाना

आता है याद मुझको बीता हुआ जमाना।


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