छवि
छवि
सावन की शीतल फुहारें, हमारे संग ठिठोली करती है ।
वो कभी-कभी चुप-चुपके, हमारे संग परिहास करती है ।।
सावन की शीतल फुहारें, हमारे संग ठिठोली करती है ।
वो कभी-कभी चुप-चुपके, हमारे संग परिहास करती है ।।
देखी स्वयं की छवि वो, हमारे दिल के आईने में ।
मेरी छवि अपने आप ही, हमारे पर वो नाज करती है ।।
देखी स्वयं की छवि वो, हमारे दिल के आईने में ।
मेरी छवि अपने आप ही, हमारे पर वो नाज करती है ।।
