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Sudhir Srivastava

Abstract

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Sudhir Srivastava

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चौपाई - सुख

चौपाई - सुख

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चौपाई - सुख ****** सुख-दुख की मत चिंता करिए। खुशी साथ नित आगे बढ़िए।। मन में सुखदा भाव बसाओ। कभी नहीं खुद को भरमाओ।। सुख-दुख जीवन का हिस्सा है। नया नहीं कोई किस्सा है।। मन में दंभ कभी मत लाना। इसको तो है आना जाना।। रिश्तों का ये एक फसाना।। इसमें उलझ नहीं तुम जाना।। खेल समझकर आगे बढ़ना। आड़ कभी इसके मत लड़ना।। कभी नहीं गम दुख का करना। सुख दुख है आपस में बहना ।। दुख के बाद ही सुख आता है। फिर पीछे दुख लग जाता है ।। क्रम ये सदा ही चलते रहते। पानी की धारा जस बहते।। कहीं नहीं दोनों टिक पाते। सदा सर्वदा आते जाते।। मन में सुखद भाव ही रखना। सुख-दुख की मत चिंता करना। खुशी साथ नित आगे बढ़ना।। कभी नहीं खुद से तुम डरना।।। सुख-दुख जीवन का हिस्सा है। कहा नया किसने किस्सा है।। नया मानकर आप न डरिए। गाँठ बाँध मत मन में धरिए।। मन में दंभ कभी मत लाना। इसको तो है आना जाना।। रिश्ता इसका बड़ा पुराना। जो भी फँसा हुआ बेगाना।। खेल समझकर खुश ही रहना। भाग्य भरोसे कभी न ढहना।। ग़म आखिर क्यों मानें गहना। सुख-दुख तो आपस में बहना ।। सुधीर श्रीवास्तव 


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