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Sudhir Srivastava

Abstract

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Sudhir Srivastava

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चौपाई -प्रकृति

चौपाई -प्रकृति

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चौपाई - प्रकृति ****** प्रकृति दर्द महसूस करोगे। या फिर सतत कष्ट भोगोगे।। करो नहीं खिलवाड़ सभी अब। जीवन सुखमय होगा ही तब। रुदन प्रकृति का भी है जारी। पड़ जाए ना हम पर भारी।। जल जंगल को आप बचाएं। दूर धरा की सब बाधाएं।। पशु पक्षी भी आज पुकारें। हरियाली है कहाँ दुआरे।। सुनिए इसकी करुण कहानी। सूख गया आँखों का पानी।। जीव जंतु अस्तित्व बचाना। धन दौलत से बड़ा कमाना।। मरने वाले वृक्ष पुकारें। तनिक आप भी आज बिचारें।। प्रकृति संतुलन करना होगा। वरना बढ़ जायेगा रोगा।। बहुत पड़ेगा कल जब रोना। काम नहीं आयेगा सोना।। मौन छोड़ अब आगे आओ। आप स्वयं को मत भरमाओ।। एक नया अभियान चलाओ। नये सिरे से इसे सजाओ।। पीड़ा कितनी प्रकृति कहेगी। मौन भला कब तलक रहेगी।। तरस तनिक बेशर्मों खाओ। या निज का अस्तित्व मिटाओ।। सुधीर श्रीवास्तव 


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