STORYMIRROR

कुमार संदीप

Inspirational

4  

कुमार संदीप

Inspirational

बुरी लत छोड़ मनुज

बुरी लत छोड़ मनुज

1 min
22.8K

हे मनुज!

मत भूल तू

ज़िंदगी है अनमोल

पहचान ले तू यथाशीघ्र

ज़िंदगी की एहमियत


बुरी आदतें छोड़ शीघ्रातिशीघ्र तू

तम्बाकू, गुटखा और सिगरेट को

मनुज तू छोड़ दे जल्द-से-जल्द

अन्यथा मनुज


आएगा एक दिन ऐसा भी

जब तेरा नामोनिशान

मिट जाएगा इस धरा पर से

बेवक्त ही, हाँ तू न जी सकेगा


ज़िंदगी जी भर

इसलिए जितनी जल्दी हो

छोड़ दे तू बुरी आदतें और

कर तू नई शुरुआत


कर कुछ ऐसा काम

कि ज़िंदगी में हो 

तेरी एक अलग पहचान।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational