STORYMIRROR

Jiyalal Dhiman

Abstract

4  

Jiyalal Dhiman

Abstract

बुढ़ापे की सनक

बुढ़ापे की सनक

1 min
375

साठ के जब मैं पार हुआ,

सिर में सफ़ेद बालों काअम्बार हुआ।

साठ के जब मैं पार हुआ,

दांत में दर्द का आभास हुआ।

साठ के जब मैं पार हुआ,

घुटनो के दर्द का अहसास हुआ।

साठ के जब मैं पार हुआ,

कमर का भी कुछ इंकार हुआ।

साठ के जब मैं पार हुआ,

पाचनशक्ति से भी लाचार हुआ।

साठ के जब मैं पार हुआ,

नजरो की पहचान से इनकार हुआ।

साठ के जब मैं पार हुआ,

ऐसा कुछ जिया तेरा हाल हुआ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract