STORYMIRROR

Deepali Mathane

Abstract

3  

Deepali Mathane

Abstract

बीतें कल की यादें.....

बीतें कल की यादें.....

1 min
195

बीते कल की यादें दिल में ऐसे झिलमिलायें

यादों के जूगनू कभी-कभी हलके से टिमटिमायें


हसी-खूशी से भरी होठों पे कुछ यादें मुस्कुराये

हर यादों में ढूँढ़ रहे सुकून के पल बसाये


बीतें कल की यादों की बरसात मन को भिगायें

कभी-कभी कुछ कडवी यादों की कसक सुलगायें


नूर बरसा के रहमतों का कुछ यादों के सायें

तपतें रेगिस्तान में भी हसीं के गुलिस्ताँ पाएं।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract