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Naveen Sharma

Tragedy Inspirational

4  

Naveen Sharma

Tragedy Inspirational

भारत से मुलाकात

भारत से मुलाकात

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कल राह में चलते-चलते भारत से मुलाकात हुई 

 जिसे लोग कहते हैं शाइनिंग उस इंडिया से थोड़ी बात हुई 

मैंने कहा बता ए मुल्क तेरा क्या हाल है 

 उसने दुखी मन से कहां जेब फटी, दिल कंगाल है

मैंने कहा क्यों झूठ कहते हो, तुम तो बड़ी तरक्की पा रहे हो

सुना है 2034 तक तीसरी सबसे बड़ी, अर्थव्यवस्था बनने जा रहे हो

सुना है विश्व में 5 ट्रिलियन तुम्हारा दाम है 

 और हमारे मोदीजी का बाईडन से ऊंचा नाम है

हमने ही तो चांद के दक्षिणी छोर पर कदम बढ़ाया है 

 बिना कोई गलती किये मंगल पर परचम फहराया है 

फिर भी न जाने क्यों तुम खुश नजर नहीं आते हो 

 क्या बात है मुझे बतलाओ तुम दुखी इतना क्यों दिखलाते हो 

 

उसने दुखी मन से कहा किस बात की खुशी मनाऊं मैं 

 अपराधी का भी धर्म हो गया किसको टीस दिखाऊ मैं 

जिनको बनना था पथ प्रदर्शक वो संसद में मौन है

 जिताना है अपने पक्ष को वह वशिष्ठ नहीं गुरु द्रोण है 

बच्ची से बलात्कार हुआ दिल पर मेरे सौ घाव हैं 

 लाइब्रेरी में बच्चे मर गए कैसे कहूं वह सिर्फ जल भराव है

 माता-पिता ने करके भरोसा, जिन बच्चों को पाल था पोसा

 दिखाकर के सपने उज्ज्वल भविष्य के, 

 बड़े शहरों ने अपनी तरफ था खींचा 

एक पेपर लीक हुआ वह सपने सारे ढह गए 

 न्यूज़पेपर की एक हेडिंग बनी मेरे बच्चे तन्हा रह गए

काला बाजार ही और मिलावट बना लोगों का इमान है

 बिना रिश्वत और सिफारिश होता नहीं कोई काम है

 

यह बातें सुन आवाक के रह गया मैं 

 कोई उत्तर समझ में आया

सुनकर भारत की बातें नवीन खुद ने ही भरमाया। 



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