STORYMIRROR

Suhas Bokare

Abstract

2  

Suhas Bokare

Abstract

बहाने मौत के!

बहाने मौत के!

1 min
84

बहाने तो ढहते हैं, झुक जा...

जिंदगी से कहते हैं, रुक जा.


बहानो का लाजमा लिये मौत खनकी है...

हमसे बडी खुश है, हम नौटंकी हैं...


बहानो का बस नही,जिंदगी लंबी है

मिलेंगे जरूर, तुम भी हो, हम भी है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract