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shourya mishra

Abstract

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shourya mishra

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बेवफ़ा शायर

बेवफ़ा शायर

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मैं बेवफ़ा हूं

        फिर भी दुनिया मेरी दीवानी हैं

मैनें कितनों का दिल तोड़ा 

      मुझे याद नहीं...

       फिर भी दुनिया मेरी दीवानी हैं


ये कैसा इन्सान बनाया तूने रब

 जिसे मोहब्बत आती नहीं ।


जो कभी हँसते थे  

        आज रो रहे हैं

 उसकी बेवफाई की कहानी सुन के

     आँखो से  बूंद बह रहे हैं।


जिस्म से खेलना तेरी आदत हो गई है

        इसी आदत से हम से बेवफाई हो गई ।

 

वह कहती है....

     अब हम तेरी यादों से भी जा रहे हैं

फिर भी कंमब्बत-ए-दिल 

      तुम्हारे पास ही आते जा रही हैं।

 

  आज कल हम वेपरवाह भी कहे जा रहे है

     फिर भी दुनिया इसी की दीवानगी में आ रही हैं।

मैं हूं बेवफ़ा शायर 

      फिर भी दुनिया मेरी दीवानी है

उनकी बातें अब मुझे भी हँसने नही देती

    उनकी यादें सोने नहीं देती

 मौत तो आती है 

     पर मरने नही देती ......


 फिर भी वह किसी और कि होने भी नही देती ...।

 वह कहती हैं 

        तुम ना हो सके किसी के भी होने नही देगें ..

  मेरे जिस्म में तेरे रूह की आदत हो गई हैं

   हर बार की तरह 

           वेपरवाह की तरह

वेवफाई कर 

        बेपनाह मोहब्बत हो गई है।


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