बालाजी दर्शन से कटे,लख चौरासी
बालाजी दर्शन से कटे,लख चौरासी
मेरे प्यारे बालाजी,आपके दर्शन से कटे लख चौरासी।
आया तेरी शरण,कृपा कर,मेरे प्रिय आराध्य बालाजी।।
जब आप कृपा करें,पत्थर भी पानी पर जाकर तैरे।
आप हो जब राजी,क्या करेगी,फिर यह दुनिया पाजी।।
आप ही बस बालाजी,मेरी इस डूबती नैया के मांजी
मेरे प्यारे बालाजी,आपके दर्शन से कटे लख चौरासी
सबने ठुकरा दिया है,सबके सब ही निकले स्वार्थी हाथी।
तू न छोड़ना बालाजी,तेरे नाम से चल रही,जीवन बाती।।
किसी से अब कोई गिला नही,पूरी दुनिया बस बाराती।
तेरे कर्म ही तेरे काम आएंगे,तेरे कर्म ही सुख-दुःख साथी।।
यह रिश्तेनाते,दोस्त,सखा सबके सब लोग बरसाती।
अच्छे वक्त में साथ होंगे,बुरे वक्त में भाग जाएंगे,बाराती।।
जाग जा साखी,इससे पहले शरीर हो जाये तेरा माटी।
अच्छे कर्म कर,यही साथ होंगे,जब टूटेगी जीवन काठी।।
निष्काम,अच्छे कर्म मे ही समाई हुई है,भक्ति बालाजी।
भक्ति बालाजी,रूठी किस्मत,भाग्य तक को चमकाती।।
नाम ले बालाजी,जिंदगी सजेगी शूलों में फूलों की भाँति।
मेरे प्यारे बालाजी,आपके दर्शन से कटे लख चौरासी।।
बहुत सोने में वक्त गंवाया,बहुत खाया-पिया तूने हाथी।
वक्त है,सुकर्म कर,त्याग दे ईर्ष्या,द्वेष,झूठ के सब साथी।।
जो मनुष्य करते है,बालाजी की भक्ति पतित तपावनी।
वो कलयुग को याद दिलाते रहते है,सदा उसकी नानी
कलयुग,अवगुण उसकी तनिक न कर सकते है,हानि।
जिनके बालाजी के भरोसे पर चलती है,जीवन कहानी।
जो करते भक्ति बालाजी,सब कर्म समर्पित करते बालाजी।
उन्हें अनायास ही कर्म बंधनो,से मुक्ति है,मिल जाती।।
जैसे सूर्य की किरणों से मिट जाती है,अंधेरे की माटी।
वैसे प्यारे बालाजी,आपके दर्शन से कटे लख चौरासी।।
