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आर्यन महर्षि

Children

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आर्यन महर्षि

Children

अनुशासन

अनुशासन

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अनुशासन में बंधे हुए हैं,

ग्रह-उपग्रह और सब तारे,

अनुशासन की सीमा में हैं,

बंधे हुए जड़-चेतन सारे।


अगर समय से सूर्य न निकले,

दूर न होगा अंधियारा,

कैसे जीवन मिले जगत को,

कैसे हो फिर उजियारा !


अगर समय पर चांद न निकले,

शीतलता न मिलेगी,

चारु चंद्र की चंचल किरणें,

फिर कैसे सुख देंगी ?


एक नियम से घूम रही है,

धरती प्यारी-प्यारी,

तभी टिके हम एक जगह पर,

टलती उलझन भारी।


वृक्षों से फल नीचे गिरते,

कभी न ऊपर जाते,

विद्या पाकर गुणी पुरुष हैं,

और नम्र हो जाते।


यह है अनुशासन की महिमा,

भुला इसे मत देना,

इससे शिक्षा लेकर अपना,

जन्म सफल कर लेना।


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