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tosh goyal

Inspirational


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tosh goyal

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अनुभव: एक तीर्थ यात्रा

अनुभव: एक तीर्थ यात्रा

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बहुत वक्त बीता तीर्थ स्थल अनेक घूमे

पवित्र नदियों में डुबकी लगाई

साधु-सन्तों के आर्शीवचन पाये

न जीवन की परिभाषा बनी

न जीने का सलीका आया।

वक्त बीतता गया वक्त ने समझाया

अनुभवों का रंग बदलता रहा तब पता चला---

हाथ पकड़ने/और आत्मा के तार थामने में फर्क है।

तभी पता चला--- प्यार का अर्थ

दूसरे की ओर झुकना नहीं है

न ही--- साथी का अर्थ मात्र सुरक्षा पाना है।

यह भी जाना कि उपहार का लेन-देन

किसी सम्बन्ध का वायदा नहीं है।

भ्रमण के अनेक दौर बीते,

अहसास बदलते रहे और--- पता चला कि---

बड़े होने का मतलब है हार को---

अपना सिर उठाकर और आंखें खोलकर झेलना

न कि बिलख उठना बच्चों की तरह।

यह भी जाना कि--- आज की सड़क आज ही बनानी होगी,

पता नहीं कल की भाग्य रेखा क्या है ?

उम्र के अनुभवी दौर में पता चला कि---

धूप और रोशनी सीमा से ज्यादा मिले तो जला देते हैं।

यह भी समझ आया कि--- अपना बाग खुद ही बनाना होगा

फूल उगाना होगा--- एक सपन फूल--- सिर्फ अपने लिए

उस इन्तज़ार के बिना कि कोई और आएगा और फूल उगाएगा।

जब यह सब सीख जाते हैं हम तब--- हो जाते हैं अन्तहीन तीर्थ के यात्री।



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