Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

tosh goyal

Abstract


4  

tosh goyal

Abstract


लडकी का बसन्त

लडकी का बसन्त

1 min 12 1 min 12


लड़की खुश है क्योंकि

उसमें सपने उगने लगे हैं।

मन के वृक्ष पर

कुहलाने लगी है कोयल

अकेले में/खिड़की से बाहर झांकती है

तो भीतर जनमती है

पहली प्रेम कविता

वह खुश है क्योंकि---

एक गन्ध-सी उभरती है उसके तन में

उस कस्तूरी गन्ध के पीछे

भागती रहती है वह जंगली मृगी की तरह

तब भीतर जनमती है

पहली बासन्ती लहर।

वह खुश क्योंकि ---

वह पानी के दर्पण में देखती है

अपना गुलाबी चेहरा

गालों पर बिखरता, टेसू रंग

होठों पर/भोर के सूरज की लालिमा

अभिभूत खुद पर

वह मुस्कराती, खुश होती है।

लड़की खुश है तो

अपनी ओढ़नी की कोर

लपेटती है उंगली की छोर पर

पैर के अंगूठे से कुरेदने लगती है

जमीन की मिट्टी।

जाने क्यों/क्या सोचती रहती है वह

मन-ही-मन मुस्कुराती

खुश होती रहती है

क्योंकि---अभी हाल ही में समझी है

उसने अपनी पहली प्रेम कविता।

और---बासन्ती रंगों को पहचाना है।

लड़की खुश है, खुश होती है, खुश होती रहेगी

कौन जाने, किसे पता ?



Rate this content
Log in

More hindi poem from tosh goyal

Similar hindi poem from Abstract