STORYMIRROR

Hardik Mahajan Hardik

Abstract

4  

Hardik Mahajan Hardik

Abstract

अनमोल छवि

अनमोल छवि

1 min
541

मधुबन हो जहां प्रेम का वहां कान्हा अनमोल छवि निहारता ।

हो अगर पुष्प सुमन मधुर महकता छवि तेरी निहारता यौवन।


दीये - सा मन जलता रहा कान्हा तुम्हारी छवि में बिराजमान।

सुंदर वन उपवन जहाँ मधुरिम खिलता अविस्मरणीय जीवन।


निहितार्थ निहित करे मन भावन सुंदर रूप तेरा हैं ये मधुबन।

खूबसूरत गरिमा हो श्रंखला तुझमें परिपूर्ण सुंदर हैं बृजभूमि।


खूबसूरत सा स्नेह मन को लुभाये पावन जल अमृत विराजे।

हो जीवन निहितार्थ कान्हा छवि प्यारी हर पल थारी निराले।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract