STORYMIRROR

पुष्पेन्द्र कुमार पटेल

Inspirational

4  

पुष्पेन्द्र कुमार पटेल

Inspirational

अमर जवान

अमर जवान

1 min
219


सीमा पर लड़ता वह अमर जवान

छोड़ आया घर -आँगन और परिवार

मान लिया उसने संसार अपना

इस रणभूमि को ही।

छोड़ आया संगी - साथी

संग खेला था जिनके,

खेलता है अब वो केवल

गोली, बारूदों और मृत्यु से।

वो गिरकर सँभल जाता है

बर्फ़ीली चादरों, पथरीली रास्तों

और कंटीली झाड़ियों पर,

वो आँसू नही बहाता

क्योंकि उसे तो बहाना है

कतरा-कतरा अपने रक्त का।

देख नही पाता दिवाली की जगमगाहट

उड़ा नही पाता होली पर गुलाल

सराबोर हो जाता है केवल

स्त्रावित होते लाल रंगों से।

उसे नही आती अब

याद अपने प्रियजनों की

वो बस करता है फरियाद

वतन पे शहादत होने की।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational