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JAYANTA TOPADAR

Abstract Tragedy Inspirational

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JAYANTA TOPADAR

Abstract Tragedy Inspirational

अमावस्या से पूर्णमासी तक...

अमावस्या से पूर्णमासी तक...

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आज बेशक़

मेरा जीवन 

अमावस्या की लंबी

रात्रिकालीन उधेड़बुन में

जूझते फिरने को 

मजबूर है...

मगर मैं हर रोज़

पूर्णमासी की

चंद्रमा का

इंतज़ार करता हूँ...

और करता ही रहूँगा...!!!


यूँ तो तक़दीर मेरी

मुझे झांसा देकर

वक्त के थपेड़ों से

खेलने को  

मजबूर किया,

मगर मैं दुबारा

पूर्णमासी की

चंद्रमा की

शीतल छाया में

अपना बेशक़ीमती जीवन

संवार लूँगा...!



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