Anil Yadav
Inspirational
बिन खता किए बेवजह खुद को मत डराना,
खुद को किसी बेपरवाह के लिए मत तड़पाना!
कोई आए तो देखो लेकिन फिसल मत जाना,
कोई डराए तो डरो लेकिन डर मत जाना!!
उसे चाहने की ...
किसी को चुना ...
तेरी सूरत है
दीदार-ए-इंतज़...
सुकून
मैं तो एक लफ़...
तुम्हें एक बा...
कभी खोना नहीं...
दिलवाले हो गए
ज़रूरी है क्य...
यह ज़मीं है सबका बसेरा, सबको इस पर बसने दो। यह ज़मीं है सबका बसेरा, सबको इस पर बसने दो।
बस इस जन्म साथ निभा देना हमें अगले पिछले जन्म से क्या है देना लेना। बस इस जन्म साथ निभा देना हमें अगले पिछले जन्म से क्या है देना लेना।
जीने की आस तो उन्हे भी थी पर जी ना सके चाहते थे वो खत लिखना। जीने की आस तो उन्हे भी थी पर जी ना सके चाहते थे वो खत लिखना।
तू पुनर्जन्म लेकर के आजा मेरो कुटिया में। तू पुनर्जन्म लेकर के आजा मेरो कुटिया में।
वो हैं अखंड ज्योति का अंग, ब्रह्माण्ड चलती है जिनके संग। वो हैं अखंड ज्योति का अंग, ब्रह्माण्ड चलती है जिनके संग।
मन के दीप जलाए रखना। आशाओं को मन में बसाए रखना। मन के दीप जलाए रखना। आशाओं को मन में बसाए रखना।
शिव ने आधा रूप नारी का। पाया था इन्हीं की कृपा से।। शिव ने आधा रूप नारी का। पाया था इन्हीं की कृपा से।।
फिर खाए जमीन पर पड़े बेलपत्र। और करती रही शिव आराधना।। फिर खाए जमीन पर पड़े बेलपत्र। और करती रही शिव आराधना।।
आत्मा अजर अमर बतलाते सभी पुराण। आत्मा अजर अमर बतलाते सभी पुराण।
वक्त की दलील वक्त आने पर ही मिलती है... वक्त की दलील वक्त आने पर ही मिलती है...
आत्म सम्मान की राह नहीं होती आसान, चुनना पड़ता है सत्य की राह को। आत्म सम्मान की राह नहीं होती आसान, चुनना पड़ता है सत्य की राह को।
दोस्त दुश्मन बन जायेंगे सच्चाई की राह में। दोस्त दुश्मन बन जायेंगे सच्चाई की राह में।
परमात्मा ने जब संभाला है प्यार इज़्ज़त शांति मिलेगी। परमात्मा ने जब संभाला है प्यार इज़्ज़त शांति मिलेगी।
छत्र बनाया गिरिधर ने जैसे हो भाल , एक उँगली पर उठाया गोवर्धन तत्काल ! छत्र बनाया गिरिधर ने जैसे हो भाल , एक उँगली पर उठाया गोवर्धन तत्काल !
है चाह ,ध्येयपथ खुले हृदय से, सबके हित मे उत्कंठित। है चाह ,ध्येयपथ खुले हृदय से, सबके हित मे उत्कंठित।
नौवाँ दिन शुभ नवरात्रि का, माँ के आँचल में आशीर्वाद पर्याप्त । नौवाँ दिन शुभ नवरात्रि का, माँ के आँचल में आशीर्वाद पर्याप्त ।
आज जगदम्बे भवानी का , अष्टम रूप हैं यह माँ गौरी आज जगदम्बे भवानी का , अष्टम रूप हैं यह माँ गौरी
शरद ऋतु ने अपना रंग बिखेरा,दिवाली की रौशनी ने घर को घेरा। शरद ऋतु ने अपना रंग बिखेरा,दिवाली की रौशनी ने घर को घेरा।
मुख पर सूरज सा तेज और फौलाद है इनके इरादों में। मुख पर सूरज सा तेज और फौलाद है इनके इरादों में।
मां चंद्रघंटा का रूप है शांति स्वरूपा। मां माथे अपने पर आधा चंद्र लगती हैं।। मां चंद्रघंटा का रूप है शांति स्वरूपा। मां माथे अपने पर आधा चंद्र लगती हैं।।