STORYMIRROR

Mallika Seshadri

Inspirational

4  

Mallika Seshadri

Inspirational

अभी न जाओ

अभी न जाओ

1 min
305

माँ, आप अभी न जाओ,  

बच्चों की पहली दीवाली है। 


आज का दिन, संतों का दिन है,

मुझको अमरत्व पाना है।

बेटी, आज मुझे जाने दे,

दीवाली तो आनी जानी है। 


बातें पूरी नहीं हुई, माँ,  

कहने को सब बाकी है। 


कहते- सुनते वक्त गुजारे,

किस्मत को मंजूर नहीं। 

दिखा दिया पथ, सिखा गई मैं

जिंदगी एक दास्ताँ रही। 

श्वास निश्वास की अंतिम घड़ियाँ ,  

मायूसी बनकर छाई हैं।

जीवन का यह कड़वा सच है,  

पर्दा तो गिरने वाला है। 

खूब लड़ी मरदानी जैसे,  

मुझसे हिम्मत पानी है।


सांस रुक गई, लफ्ज थम गए,  

अब जन्नत में ही मिलना है।

धू - धू करती चिता जली है,

माँ की अंतिम दीवाली है।


खुद जलकर औरों को निखारा,

माँ की यही कहानी है।

रामचरित की नेकी समझो,

बच्चों, ये ही दीवाली है। 


 



Rate this content
Log in

More hindi poem from Mallika Seshadri

Similar hindi poem from Inspirational