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suman singh

Abstract


4.3  

suman singh

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आशियाने की चाहत

आशियाने की चाहत

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आशियाने की तमन्ना तो हर किसी को होती है।

किसी को जन्म से ही मिल जाता है ,

और किसी को बहुत संघर्षों के बाद मिलता है ।।


कोई इमारतें बनाता है , कोई गुफाएँ बनाता है ।

और कोई कहीं पर भी अपना घोंसला बना लेता है ।।


छत तो आश्रमों के ऊपर भी होती है ,लेकिन फिर भी ,

अनाथ बच्चे अपनत्व की लालसा रखते है ।।


नर्सरी में उपजा पौधा भी किसी वासिंदे की बाट

 जोहता है कि , आएगा कोई खुदा का बंदा और मुझे मेरे घर में जगह देगा ।


एक बड़े से गमले में लगाएगा मुझे ,

और मैं एक स्थायित्व घर का अहसास कर इतराऊगाँ ।


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