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Jyoti Astunkar

Abstract Inspirational

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Jyoti Astunkar

Abstract Inspirational

आशियाना

आशियाना

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तिनका-तिनका जोड़कर,

कुछ बनाना भी क्या जुनून होता है,

उस चिड़िया को भी घोंसला बनाने में,

न जाने कितना ही सुकून मिलता है,


ज़मीन से उठाया हुआ,

कोई छोटा सा तिनका हो,

या आते-जाते राहों में रुककर,

लिया हुआ एक पर्दा हो,


छोटे-छोटे तिनकों से ही तो,

घोंसले की दीवार बनती है,

सुन्दर-सुन्दर पर्दों से ही तो,

झरोखों में बहार नज़र आती है,


एक-एक तिनका जोड़कर,

घोंसले को जो आकार मिला है,

दरों-दरवाज़ों और झरोखों से ही तो,

आशियाने में एक संसार बसा है,


हर एक तिनके से है,

एक याद जुड़ी,

राहों में आयी मुश्किलों से है,

एक कहानी जुड़ी,


सुन्दर आशियाने के झरोखे में,

बहती हवा जो अंगड़ाई लेती है,

न जाने राह में आने वाली,

कितनी ही मुश्किलों की याद दिलाती है,


सच ही कहा गया है की,

दुःख मिले तो सुख का एहसास होता है,

मुश्किलें जो आएं राहों में तो,

सफर समाप्त होने का एहसास होता है


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