आशियाना तुम्हारा
आशियाना तुम्हारा
बहुत हो गया झूठा फसाना तुम्हारा
कहीं और जा के ढूंढो आशियाना तुम्हारा
तुम्हें बेवफा कह देना भी जायज नहीं
पर मेरे दिल में रहने के तुम लायक नहीं
हां मानता हूँ याद आयेगा वो हंसना हंसाना तुम्हारा
मुझे देख कर वो पलकें झुकाना तुम्हारा
वो तेरा झांकना खिड़की से जब तेरी गली से गुजरता था मैं
ये मोहब्बत ही फरेब था मेरी जाना तुम्हारा
कहीं और जा के ढूंढो आशियाना तुम्हारा
तुम्हारे लिए मर गया अब ये दीवाना तुम्हारा
ना सोचा न समझा अपना सब कुछ तुम पर वार दिया
हकीकत तो ये थी मैंने बेवफा से प्यार किया
मुझसे मिलने आने का वो बहाना तुम्हारा
मेरे लिए वो सबसे लड़ जाना तुम्हारा
कहीं और जा के ढूंढो आशियाना तुम्हारा
रास नहीं आया " प्रिन्स "मुझे ये इश्क निभाना तुम्हारा
कहीं और जा के ढूंढो आशियाना तुम्हारा ...........

