STORYMIRROR

Rachana Sharma

Comedy

2  

Rachana Sharma

Comedy

आजादी

आजादी

1 min
13.6K



सर उठाकर चल सकूं वो राह क्यूं ना बन सकी
मेरा ..........
कितनी कलियों को खिज़ा खिलने से पहले खा गयी (कन्या भ्रूण हत्या)
और कुछ ऐसे खिली कि फूल वो न बन सकी (दामिनी इन्हीं में से एक थी)
मेरा .........
कह दिया देवी कभी तूने मुझे दासी कहा
तेरी नज़रों में कभी इन्सान मैं न बन सकी
मेरा ..........
कहते हो सारे जहाँ से अच्छा हिंदोस्तान को
हर गली हर मोड़ पर मुझको यहाँ दहशत मिली
मेरा ......
बदलो इस तस्वीर को मेरे वतन के लाडलों
फिर किसी बेटी के आंसू से न भीगे ये जमीं
मेरा ...

 

 

 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Comedy