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Neha H Bhavnani

Inspirational

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Neha H Bhavnani

Inspirational

आजादी तालों से

आजादी तालों से

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आशिक़ी और बंदगी,

दोनों को ही नापसंद है यह पाबंदी।


ना इश्क़ को बांध सके यह रिवाज़ और समाज

और ना ही बंदगी किसी धर्म की मोहताज।


न इश्क़ बंध पाया कभी क़िस्मत की लकीरों में,

न बंदगी कभी अंधविश्वास की ज़ंजीरो में।


जो इश्क़ तेरा रूहानी है और दिल में है सच्चाई,

तो न खुदा अलग है तुझसे न तेरे इश्क़ से खुदाई।


खुश होगा खुदा तेरा,

जब ताले सोच के खुलेंगे,

खुली सोच की आज़ादी मिलेगी अगर

तो सेहरा में भी गुल खिलेंगे।


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